Semantic SEO क्या है? | What is Semantic SEO? in Hindi

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  • Post last modified:July 12, 2021

Semantic SEO क्या है?

क्या आप अपनी वेबसाइट को हर 6 महीने में आने वाली कोर अपडेट से दूर रखना चाहते हैं? क्या आप अपनी वेबसाइट के रैंकिंग Keywords को बढ़ाना चाहते हैं? या क्या आप Featured Snippet में जगह पाना चाहते हैं?

यह सारी चीजें पॉसिबल है Semantic SEO के जरिए। Semantic SEO क्या है? इसका मतलब क्या है? यह कैसे आप अपनी वेबसाइट में इम्प्लीमेंट कर सकते है? इन सभी सवालों के जवाब आज आपको मिलने वाले है। आपसे रिक्वेस्ट है इस आर्टिकल को किसी साउथ की मूवी की तरह हर एक सिन को ध्यान लगा कर देखे (हर लाइन को ध्यान से पढ़े)

Semantic SEO उम्र में नॉर्मल SEO से सिर्फ 1 साल छोटा है। 1998 में लैरी पेज ने PageRank Algorithm का पेटेंट फाइल किया था। जिसने गूगल की शुरुआत की और 1999 सर्गेई ब्रिन ने DIPRE नाम का पेटेंट फाइल किया था। उसने Semantic Search की शुरुआत की और Semantic SEO की भी शुरुआत की। अगर Semantic SEO लगभग-लगभग नॉर्मल SEO जितना ही पुराना है। तो उसके बारे में आप कम आर्टिकल क्यों पढ़ते हैं? डिजिटल मार्केटिंग इंस्टीट्यूट के कोर्स में इसके Module क्यों नहीं होते हैं? बुलबुले और छपरी लोग इसके बारे में वीडियो क्यों नहीं बनाते हैं?

साढ़े 11 साल के लड़के ने 1 साल में Semantic SEO से कमाए ₹99 करोड़ रुपए। इस तरह के Thumbnails आपको क्यों नहीं दिखाई देते हैं? इन सभी सवालों का जवाब इतना ज्यादा आसान है की हमें एक कहानी सुननी पड़ेगी। पाटलिपुत्र यानी कि पटना के इलाके में करीब 1.5 हजार साल पहले आर्यभट्ट नाम Mathematician हुए। जिन्होंने ट्रिग्नोमेट्री, पाई, टाइम, एस्ट्रोनॉमी के बारे में काफी काम किए। उस वक्त लोग मानते थे की धरती अपनी जगह पर स्टेबल है और पूरा आसमान इसके चारों तरफ घूमता है।

लेकिन आर्यभट्ट ने कैलकुलेशन के बेस पर बताया की धरती अपनी एक्सेस पर दिन भर में घूमती है और जो चांद है उसकी अपनी रोशनी नहीं होती है, वह सूरज की रोशनी से चमकता है। आर्यभट्ट ने ही सोलर और लूनर एक्लिप्स मतलब कि सूर्यग्रहण और चंद्रग्रहण वगैरह को Scientifically Explain किया। यह सब आर्यभट्ट ने इसलिए नहीं किया क्योंकि उनकी जॉब थी, उन्हें ट्विटर पर Follower बढ़ाने थे या टिक-टॉक पर वीडियो बनाना था। 

आर्यभट्ट का सिर्फ एक मकसद था अपने आस-पास की दुनिया को समझना। यह दुनिया को समझने की चाह इंसान के अंदर तब आती है जब उसकी बेसिक जरूरतें पूरी हो जाती हैं। अगर आप भूखे इंसान को यह सब ज्ञान की बातें बताएंगे तो उसे ये बेकार लगेगी। जब इंसान Socially, Financially स्टेबल होता है, तो वह बौद्धिक होता है। दुनिया को समझने की कोशिश करता है। आजकल जब भी आप बाहर घूमने जाना चाहते हैं, तो Dubai, Switzerland, Manali का नाम आपके दिमाग में आता है।

Semantic SEO क्या है What is Semantic SEO in Hindi

बर्फीली जगह सबको अच्छी लगती है। लेकिन हजारों साल पहले जब बिजली नहीं होती थी तब इन जगहों पर लोग नहीं जाना चाहते थे। जीवन सर्दी में नहीं गर्मी में पनपता है। अधिकतर शहर/गांव नदियों किनारे होते थे। जिससे लोगों को पीने का पानी मिलता था, फसल भी होती थी, लाइफ सेटल होती थी। तो लोग अपनी रोज की जरूरतों से आगे बढ़कर इन सारी चीजों की तरफ ध्यान देते थे। अब जब आज लोगो की जरूरतें पूरी होती ही नहीं तो वो इनकी तरफ ध्यान देंगे हि क्यों? हो सकता है आपको इस कहानी का मतलब समझ में आ गया हो? तो वापस चलते हैं Semantic SEO की तरफ। 

Semantic SEO के लिए पेटेंट जरूर सर्गेई ब्रिन डाल दिए थे 1999 में। लेकिन इस पर असल में काम कर पाना 1999 में मुश्किल था। Well Formed Databases नहीं थे, कंप्यूटिंग काफी महँगी हुवा करती थी, टेक्नोलॉजी भी अवेलेबल नहीं थी। Semantic SEO Pages की जगह Entities पर फोकस करता है और बैकलिंक्स की जगह रिलेशनशिप पर फोकस करता हैं। 

मान लीजिए आप एक xyz इंसान को जानते है, xyz क्या है? टिपिकल वेब फॉर्मेट में xyz एक person नहीं हो सकता है। xyz की वेबसाइट हो सकती है। जैसे whatainfo.in और इस वेबसाइट में Pages हो सकते हैं और उन सारे Pages के आपस में लिंक्स हो सकते हैं। लेकिन xyz एक person नहीं हो सकता है। क्योंकि इंटरनेट पर सिर्फ वेबसाइट हो सकती है। इंटरनेट का मतलब है कंप्यूटर के बीच का नेटवर्क और इंसान या प्लेस कोई भी चीज कंप्यूटर के अंदर नहीं रहती है। कंप्यूटर के अंदर सिर्फ वेबसाइट रह सकती है। लेकिन इंटरनेट और वेबसाइट के इस टिपिकल कॉन्सेप्ट की प्रॉब्लम यह है की वेबसाइट आर्टिफिशियल होती है, उन्हें बनाया जाता है। 

अलग-अलग लोगों के लिए, अलग-अलग जगहों के लिए। लेकिन यह लोगों के बीच के रिलेशन को नहीं समझ सकती हैं और न ही समझा सकती है। यह गूगल के लिए एक बड़ी प्रॉब्लम थी। क्योंकि अगर वह इंफॉर्मेशन के लिए सिर्फ वेबसाइट पर डिपेंड करेगा तो वो सिर्फ ऐसे लोगों के सवालों का जवाब दे सकेगा जो टेक्निकल सवाल पूछ रहे है। अगर कल किसी के दादा फोन उठाकर उस पर भजन सुनना चाहते हैं या किसी की मां पास्ता की रेसिपी देखना चाहती है।

तो गूगल के लिए जरूरी है कि वह भजन की कॉन्सेप्ट को समझे और यह डिसाइड कर पाए कि भजन सर्च करने वाले यूजर को आर्टिकल कि link दिखानी हैं या सीधे भजन का वीडियो दिखा देना है। इसलिए गूगल ने अपने सर्च रिजल्ट्स को सिर्फ 10 लिंक वाले सर्च रिजल्ट्स की जगह नॉलेज ग्राफ और रिच रिजल्ट से भरना शुरू कर दिया। चीजों को ज्यादा बेहतर तरीके से समझने की शुरुआत की। 

Semantic SEO जरूरी क्यों है? / Advantages Of Semantic SEO

1. Semantic SEO में आप अपनी वेबसाइट को सिर्फ किसी Keyword के पल्लू से छुड़ाकर उसे अपने टॉपिक के आसपास नेचुरली डेवलप करते हैं। आप अपने टॉपिक को सराउंडिंग टॉपिक से रिलेट करते हैं। अगर आपकी वेबसाइट किसी शहर के डेंटल क्लीनिक के बारे में है, तो आप सिर्फ डेंटल क्लीनिक के बारे में कंटेंट नहीं लिखेंगे। बल्कि ऐसे डेंटल क्लिनिक के बारे में कंटेंट लिखेंगे जो शहर के किसी खास इलाके में है। क्लीनक तक पोहचने का मैप नैचुरली बताए, आसपास के किसी लैंडमार्क को Include करिए। कंटेंट को शहर के लोगो के लिए ऑप्टिमाइज़ करिए। जब सर्च इंजन आपके वेबसाइट के कंटेंट को उस शहर और उसके आसपास के लोगों या जगहों से रिलेट करेंगे। तो आपकी जो वेबसाइट है उसके रैंकिंग Keyword अपने आप बढ़ेंगे। आपको बेहतर लीडस् मिलेगी ज्यादा लीडस् मिलेगी। 

2. Semantic SEO और Semantic तरीके से लिखा गया कंटेंट आपकी वेबसाइट को ना सिर्फ ज्यादा Keywords के लिए रैंक करा सकता है बल्कि बार-बार आने वाली कोर अपडेट के नुकसान से भी बचा सकता है। गूगल ने खुद कई बार कहा है कि कोर अपडेट के जरिए वो किसी खास तरह की वेबसाइट को टारगेट नहीं करता है। बल्कि सर्च रिजल्ट्स को ऑप्टिमाइज़ करता है। गूगल अपनी अंडरस्टैंडिंग को अपडेट करता रहता है और अगर आपकी वेबसाइट पहले से ही रिलेशन को बेहतर तरीके से Explain कर रही है तो आपको इन अपडेट से कोई खास फर्क नहीं पड़ने वाला है। 

3. Semantic SEO से Featured Snippet में जगह बना सकते हैं जगह बढ़ा सकते हैं, जो आपको बेहतर ब्रांडिंग और काफी सारा ट्रैफिक देती है। 

Featured Snippet Machine Learning के द्वारा चलाए जाते है जो Semantic रिलेशन के बेस पर ही जनरेट होते हैं। दरअसल गूगल खुद भी इन फीचर्स को बहुत ज्यादा रेगुलेट नहीं करता है। So Semantic SEO मतलब ज्यादा Featured Snippet. 

4. Semantic SEO आपकी वेबसाइट को फ्यूचर प्रूफ बना सकते है। Structured Data या Schema Data वेबसाइट और वेब प्रॉपर्टीज में जरूरी होता जा रहा है। जो वेबसाइट शुरुआत से ही इस नए फॉर्मेट को अपनाएगी उन्हें फ्यूचर में फायदा होगा।

आखिर आप Semantic SEO में शुरुआत कैसे कर सकते हैं? अपनी वेबसाइट में कैसे इम्प्लीमेंट कर सकते हैं? इसके तीन पार्ट है 

  • Keyword Research 
  • Content 
  • Schema Data 

Keyword Research में आपको जेनेरिक अप्रोच लगानी होगी। एक बार जब आप अपने Keyword डिसाइड कर लेते हैं, तो आपको उनके रियल वर्ल्ड प्रैक्टिकल के बारे में भी सोचना पड़ेगा। अगर आपका Keyword है कार गैरेज न्यू दिल्ली

तो आपको Keyword सोचने होंगे की किस तरह की ऑडियंस आपकी टारगेट ऑडियंस हो सकती है। वो किस तरह के सिनेरियो में आपके कंटेंट को यूज कर सकते हैं? क्या आपका कंटेंट उनकी प्रॉब्लम को सॉल्व करता है? या कोई सर्विस ऑफर करता है या कोई और एक्शन लेने के लिए बढ़ावा दे रहा है। आपको अपने Keyword को थ्योरेटिकल फेज की तरह नहीं इस्तेमाल करना है, बल्कि उसे डेवलप करिए उसे इन्हैंस करिए।  

Content अगर आपने फर्स्ट स्टेप के हिसाब से अपने Keyword को इन्हैंस कर लिया है, उसे प्रैक्टिकल तरीके से कन्वर्ट कर लिया है। तो आपका कंटेंट भी ज्यादा प्रैक्टिकल होगा। जैसा आपको ध्यान रखने की जरूरत है कि आपके कंटेंट में Keywords के जो रियल वर्ल्ड रिलेशन है उन पर फोकस किया जाए। 

Schema यह Semantic SEO का सबसे जरूरी पार्ट है। कंटेंट एक चीज है लेकिन सर्च इंजन के लिए Relationship या Entities को समझने का सबसे आसान तरीका है Schema Data. 

Schema Data सर्च इंजन को बिना Machine Learning या AI यूज़ किए सभी जानकारी दे देता है बड़ी ही आसान समझने लायक फॉर्मेट में। 

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