पढाई में मन कैसे लगाए? | How to improve recall ability

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  • Post last modified:March 3, 2021

पढाई में मन कैसे लगाए ? और जो पढ़ा है उसे याद कैसे रखे ?

एक बार एक बच्चा काफी सारे अंगूर को लेकर उनकी माला बनाता है और उसे पेड़ पर लटकाने जाता है। लेकिन यह क्या सारे अंगूर दूसरी तरफ से गिर जाते हैं। वह फिर मोतियों की माला बनाता है और दोबारा से सारे मोती उस धागे से गिर जाते हैं। वह हैरानी में पड़ जाता है कि ऐसा क्यों हुआ। वह पास खड़े आदमी से पूछता है, अंकल अंकल ऐसा क्यों हुआ? सामने खड़ा आदमी उसे बताता है कि तुम अपने धागे में knot यानी गांठ बांधना भूल गए थे। ज्यादा तर स्टूडेंट्स के साथ यही प्रॉब्लम होती है, कि वह बहुत सारी नॉलेज को माइंड में डालते रहते हैं लेकिन वह नॉलेज माइंड से उतनी ही जल्दी निकल जाती है जितनी जल्दी हमने उसे माइंड में डाला था। क्योंकि हम भी इस बच्चे की तरह माइंड में मेमोरी knot बांधना भूल जाते हैं।

आज हम वो मेमोरी knot बांधना सीखेंगे जिससे हमें वो सभी चीजें याद रह सके और वो भी साइंटिफिक Method से। यह सारे Idea’s हम Peter C Brown की book Make It Stick “the science of successful learning” से ली गई है। तो चलिए आगे बढ़ते है, 

सबसे पहला पॉइंट है To Learn, Retrieve

ऑथर कहते हैं कि बहुत ही कम स्टूडेंट्स को मेमोरी knot बांधने का तरीका आता है। ज्यादा तर स्टूडेंट्स समझते हैं कि हमारी Learning तब होती है जब हम ब्रेन में डाटा एंट्री करते हैं। फिर भी उन्हें कुछ याद नहीं रहता। जबकि टॉपर्स को पता होता है कि Learning तब होती है जब हम पढ़ने के बाद ब्रेन से डाटा बाहर निकालते हैं। ऑथर  कहते हैं कि 1885 से Psychologist Forgetting Curve बना रहे हैं। जिससे यह पता चलता है कि पढ़ने के कुछ देर बाद ही हम से 70% डाटा भूल जाते हैं। उस बच्चे की माला की तरह हमारे मोती उसी वक्त निकल जाते हैं। बाकी बचा 30% डाटा हमारे ब्रेन से धीरे-धीरे निकलता है।

अब सवाल यह है कि डाटा हमारे ब्रेन में स्टोर कैसे रहेगा? 

2010 में New York Times में एक स्टडी पब्लिश हुई थी, इसमें स्टूडेंट्स को एक passage पढ़ने को कहा गया और उसके थोड़ी ही देर बाद उन्हें वह passage RECALL करने के लिए भी कहा। जब फिर से एक हफ्ते के बाद उसी passage पर दोबारा से टेस्ट हुआ, तो वह passage स्टूडेंट्स को 50% याद था। यानी सीधा 20% की मेमोरी इंप्रूवमेंट। 

1939 में एक और बहुत फेमस स्टडी हुई थी, जिसमें 6060 स्टूडेंट्स ने हिस्सा लिया था। इसमें स्टूडेंट्स ने 600 शब्द के passages पढ़े, इसके बाद उन्हें अलग-अलग टाइम में उन passages को RECALL करने के लिए कहा गया।

इसमें से दो important result सामने आये

पहला, जिन स्टूडेंट्स ने passage पढ़ने के बोहोत दिनों के बाद उन passage को recall किया था। उन्हें वो passage उतना ही कम याद था। वहीं जिन स्टूडेंट्स ने passage पढ़ने के कुछ देर बाद ही उस passages को recall किया था उन्हें passage ज्यादा याद था। दूसरा, जिन स्टूडेंट्स ने passages को जल्द ही recall कर लिया था उन्होंने उतना ही कम डाटा भुला था। Recall करने का मतलब है हमने मेमोरी knot लगा दिया। 

दूसरा पॉइंट कहता है Mix-up Your Practice

8 साल के काफी सारे बच्चों ने अपनी जिम क्लास में अपने बीन बैंग को बकेट में डालने की प्रैक्टिस की। इन 8 साल के बच्चों को दो ग्रुप में बाटा गया। Group A और Group B, Group A के स्टूडेंट्स ने बकेट को अपने से 3 फीट की दूरी पर रखा और उसमें ही 12 हफ्ते तक बीन बैंग फेंकने की प्रैक्टिस की। Group B के जो स्टूडेंट थे उन्होंने कभी खुद से बकेट को 2 फीट की दूरी पर रखा, और उसमें बीन बैंग फेंकने की प्रैक्टिस की। कभी बकेट को खुद से 4 फीट की दूरी पर रखा और फिर उसमें बीन बैंग फेंकने की प्रैक्टिस की।

अब 12 हफ्तों के बाद दोनों ग्रुप Group A और Group B स्टूडेंट्स को टास्क दिया गया और बकेट को स्टूडेंट्स से 3 फीट की दूरी पर रखा गया। अब आपके लिए सवाल यह है कि किन स्टूडेंट्स ने इस टेस्ट में अच्छा परफॉर्म किया होगा Group A ने या Group B ने? ज्यादा तर लोग यही बोलेंगे की Group A ने ही अच्छा परफॉर्म किया होगा। क्योंकि इन लोगों ने तो पूरे 12 हफ्ते 3 फीट दूर बकेट में ही बीन बैंग फेंकने की प्रैक्टिस की थी। लेकिन सरप्राइजिंगली अच्छा परफॉर्म Group B ने किया, जिन्होंने इन 12 हफ्तों में कभी भी सिर्फ 3 फीट दूर बकेट रखकर उसमें बीन बैंग फेंकी ही नहीं थी। बल्कि बकेट की दूरी बदलते रहे।

इस Experiment का Conclusion यह था कि हम अपनी लर्निंग जितनी मिक्स्ड रखेंगे हमे उतने ही अच्छे Results मिलेंगे। मगर हम में से कई लोग बोलेंगे कि नहीं हम जिम के Experiment को ब्रेन लर्निंग से compare नहीं कर सकते।

तो कोई बात नहीं हमारे पास एक और case study है,

एक स्टडी में स्टूडेंट्स को दो ग्रुप में Divide किया गया Group A और Group B, और इन दोनों ग्रुप्स को 4 obscure geometric solid के volume निकालने का method बताया। अब Group A और Group B को इनसे रिलेटेड same Question प्रैक्टिस करने के लिए दिए गए। बेशक Question इन दोनों ग्रुप को same दिए गए थे, लेकिन सीक्रेट इन Question के Sequence में था। Group A के स्टूडेंट्स को Question Cluster में दिए गए थे। यानी 4 Question Half Cone से थे, फिर अगले 4 Question Spherical Cone से थे और etc. लेकिन Group B के स्टूडेंट्स को यही Question मिक्स कर दिए गए। जब इन दोनों ग्रुप का टेस्ट बाद में लिया गया तो Group A ने 60% स्कोर किया। जबकि Group B ने 89% स्कोर किया। यानी 29% इंप्रूवमेंट !

तीसरा पॉइंट कहता है Embrace Difficulties 

ऑथर कहते हैं की Neural Scientist Nobel Laureate “Eric kandel” ने ये सिद्ध किया है की हम जब भी कुछ नया सीखते है तो हमारे ब्रेन में Real Changes होते हैं। हमारे ब्रेन न्यूरॉन एक न्यू ब्रांच create करते हैं, जो दूसरे न्यूरॉन के साथ कनेक्ट करते हैं। अब आप कहेंगे हमें यह कैसे पता है? दरअसल साइंटिस्ट ने sea slug को लिया क्योंकि उसके न्यूरॉन का साइज काफी बड़ा होता है। जब sea slug को इलेक्ट्रिक शॉक दिया गया, तो उसके ब्रेन में न्यूरॉन का स्ट्रक्चर चेंज हुआ। तो इसका मतलब है कि आपका ब्रेन का स्ट्रक्चर ये आर्टिकल पूरा पढ़ने के बाद थोड़ा अलग होगा। अगर हम उसे आर्टिकल पढ़ने से पहले वाले ब्रेन स्ट्रक्चर के साथ compare करें। यानी learning changes the brain structure और शायद इसी वजह से नई चीजें सीखने में हमें कठिनाई होती है। 

चौथा पॉइंट कहता है Explain It Like I am 5

यह पॉइंट कहता है कि जब हम कोई नया Concept पढ़ते है तो वह हमें तब तक समझ नहीं आता जब तक हम उसे एक बहुत ही सिंपल भाषा में नहीं समझा सकते। इतनी सिंपल भाषा कि 5 साल के बच्चे को भी समझ आ जाए। होता यह है कि हम में से ज्यादा तर लोग जब कोई नया Concept पढ़ते हैं तो हम सोचते हैं कि जब तक हम कोई मुश्किल शब्द या साइंटिफिक शब्द नहीं बोलेंगे तब तक बाकियों को नहीं लगेगा कि हमें वह Concept समझ आ गया। आप 3 इडियट्स का वो सीन याद करो जब रैंचो से मशीन कि डेफिनेशन पूछी गई। हाला की टीचर ने उसे except नहीं किया क्यों की उसमे कोई साइंटिफिक शब्द नहीं था। रैंचो की वो बात आज भी सभी को याद होगी। वहीं जब साइलेंसर ने वहीं डेफिनेशन मुश्किल शब्दो मे और साइंटिफिक शब्दो मे कहीं तो उसे टीचर द्वारा except किया गया। फिर भले ही वो खुद टीचर को समझ ना आ गई हो।

Einstein ने भी कहा था “if you can’t explin it simply, you don’t understand it well enough”. इसी Concept पर reddit .com पर एक बहुत ही फेमस पेज है, जिसका नाम है ‘explain like i’m five’ जिसमें लोग अपने मुश्किल से मुश्किल Question पूछते हैं और बाकी Expert लोग उसे सिंपल से सिंपल भाषा में समझाने की कोशिश करते हैं। हम जब पढ़ाई कर बुक बंद करेंगे तब हमें कुछ ऐसे समझना चाहिए या किसी और को समझाना चाहिए मानो जैसे हम किसी 5 साल के बच्चे को समझा रहे हो। जिसमे कोई मुश्किल शब्द न हो, कोई साइंटिफिक शब्द न हो ताकि हमें अच्छे से समझ आ जाये। 

पाँचवा पॉइंट कहता है Prime For Learning

यह पॉइंट कहता है कि अगर हम कुछ नया सीखने से पहले अगर उस टॉपिक से रिलेटेड कोई भी वीडियो या कोई समरी देख लेते हैं और उसके कुछ टाइम के बाद सिमिलर कॉन्टेंट को पढ़ते हैं, तो हमारा ब्रेन उस टॉपिक को समझने के लिए तैयार हो जाता है। जल्द ही न्यूरल कनेक्शन फॉर्म हो जाते हैं। यह दूसरे तरीके से भी काम करता है, मतलब अगर हम कोई प्रॉब्लम solve कर रहे हैं और अगर हमे उस प्रॉब्लम का कुछ हिस्सा पता है। क्यों की हमने पहले कहीं देखा था या पढ़ा था, तो ऐसी कंडीशन में हमारा ब्रेन उस प्रॉब्लम का solution बहुत जल्द निकाल लेता है। क्यों कि कहीं ना कहीं हम उस पॉइंट को recall करते है। आसान भाषा में कहें तो हम जब किसी फिल्म का ट्रेलर देखते है और जब असल में फिल्म देखने बैठ जाते है तो हमे कुछ चीजे recall होती रहती है। क्यों कि हमने उन्हें कहीं देखा है, सुना है। साइंटिस्ट इसे Anchoring Effect भी कहते है। 

तो दोस्तों आज हमने कुछ ऐसे तरीके सीखे है जिनकी मदद से हम एक इफेक्टिव स्टडी कर सकते है और जो सीखा है उसे अच्छे से याद भी रख सकते है। 

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