Neeraj Chopra Inspirational Success Story In Hindi

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  • Post last modified:September 3, 2021

दोस्तों आज Neeraj Chopra नाम पूरे भारत में गूंज रहा है। टोक्यो ओलंपिक में गोल्ड मेडल जीतने के बाद  Neeraj आज देश की शान बन चुके हैं। लेकिन क्या आपको पता है कि नीरज की इस सक्सेस के पीछे उनकी सालों की मेहनत और काफी स्ट्रगल छुपा है। आज ये गुड लुकिंग एथलीट बचपन में 80 किलो का हुआ करता था और लोग नीरज का मजाक उड़ाते थे।

किसान फैमिली से होने के और ओलंपिक से कुछ समय पहले ही इंजरी होने के बावजूद भी  Neeraj ने कभी हार नहीं मानी। सिर्फ 23 साल की उम्र में यह पूरे देश और खास कर हमारे youth के लिए एक इंस्पिरेशन बन चुके हैं। ये आर्टिकल हर उस इंसान के लिए जरुरी है जिसके बड़े सपने है और जो जिंदगी में कुछ बड़ा करना चाहता है। दोस्तों Neeraj Chopra का जन्म 24 दिसंबर 1997 को हरियाणा के एक छोटे से गांव खंदरा में हुआ। 

उनकी पूरी फैमिली असल में खेती-बाड़ी करती है। अब क्योंकि फैमिली में उनको मिलाकर चार भाई बेहेन है और Neeraj घर की पहली संतान थे। तो इसीलिए बचपन में उन्हें सबसे ज्यादा लाड प्यार मिला और इसी वजह से उनकी हेल्थ भी बढ़ने लगी। तभी से नीरज की जर्नी शुरू हुई जब उनकी उम्र सिर्फ 11 साल थी लेकिन उनका वेट करीबन 80 किलो हो चुका था।

जिस वजह से उनके साथ के बच्चे और लोग उनका बहुत मजाक बनाते थे और इसी रीजन की वजह से बचपन में उनकी self-esteem बहुत low रहती थी। नीरज बताते हैं कि ऐसे नेगेटिव लोगों के बीच रहने से उनका सेल्फ कॉन्फिडेंस कम होता जा रहा था और उन्हें नहीं लगता कि वह लाइफ में कुछ बड़ा कर पाएंगे। मगर इस टाइम उन्होंने तय किया की और अपना मजाक नहीं बनने देंगे। 

उनके परिवार वालों ने उन्हें पानीपत स्टेडियम ज्वाइन कराया, जहां वह अपना वेट लूज करने के लिए रनिंग करते थे। लेकिन एक बार उन्होंने अपने सीनियर जयवीर चौधरी को जैवलिन थ्रो करते हुए देखा जो उस टाइम जैवलिन में हरियाणा को रिप्रेजेंट करते थे। तो एक दिन उनके सीनियर ने उनसे कहा कि वह भी जैवलिन थ्रो करके देखें और पहले ही थ्रो में Neeraj ने बहुत दूर जैवलिन थ्रो किया।

जिसे देखकर उनके सीनियर ने उनसे कहा कि Neeraj तुमने बहुत ही अच्छा थ्रो किया है और तुम इस गेम में बहुत आगे जा सकते हो। फिर यह सुनकर नीरज ने अपनी ट्रेनिंग करना स्टार्ट किया जिसे करते ही वह कहते हैं कि उन्हें ये समझ आया कि वह बहुत ही अच्छा कर सकते हैं। जिससे उनकी self-esteem बढ़ गई और उन्होंने डिसाइड किया की वो जैवलिन में ही अपना करियर करेंगे। 

काफी समय तक ट्रेंनिंग करने के बाद Neeraj ने अपने फादर से कहा कि उन्हें एक जैवलिन खरीदना है जिसकी कीमत ₹100,000 है। जो एक किसान के लिए बहुत बड़ी रकम होती है और उस टाइम उनके घर की रिनोवेशन चल रही थी। पर फिर भी उनके फादर ने सारा काम रोककर नीरज को सबसे पहले जैवलिन खरीद कर दिया और उनके सपनो को फुल सपोर्ट किया। 

दोस्तों हम यहां यह कहना चाहेंगे कि घर वाले भी तभी सपोर्ट करते हैं जब हम उनको चाहे छोटा-मोटा ही सही पर कुछ पहले करके दिखा दे। जब उन्हें हमारी आंखों में वह पैशन और डेली लाइफ में अपने सपनों को पाने के लिए हार्डकोर नॉनस्टॉप self-discipline देखता है, तो वह भी हमें सपोर्ट करने और रिस्क लेने के बारे में सोचते हैं। 

वैसे भी फैमिली के सपोर्ट ना करने का मतलब यह थोड़ी ना होता है कि हम भी अपने सपनों के साथ छोड़ दें। अगर अभी कोई पेरेंट्स ये आर्टिकल पढ़ रहा है तो आपसे request है की आप अपने बच्चे के सपनो को और उन्हें सपोर्ट करो। आपका सपोर्ट उनके लिए सब कुछ होता है। Neeraj पानीपत में उनका ट्रेंनिंग कर पाना बहुत मुश्किल हो रहा था, क्योंकि वहां जैवलिन थ्रो की प्रॉपर फैसेलिटीज नहीं थी।

जिस वजह से वह 14 साल की एज में पंचकूला शिफ्ट हो गए और वहां स्पोर्ट् नर्सरी में अपनी ट्रेनिंग शुरू कर दी जहां वह बाकि एटलीस्ट के साथ ट्रेन हुए। Neeraj जब अपना नेक्स्ट थ्रो करके अपना रिकॉर्ड ब्रेक करते थे तो वह उनके लिए एक मोटिवेशन पल की तरह काम करता था। नीरज बताते हैं उनकी मोटिवेशन उनके हर बेस्ट थ्रो के बाद इनक्रीस होती रहती थी जिस वजह से वह अपनी लिमिट को और पुश करते रहते थे।

जिसके बाद 2012 में उन्होंने लखनऊ में उन्होंने अपना पहला जूनियर नेशनल खेला और 68.46 मीटर का थ्रो करके नेशनल रिकॉर्ड बनाया। इसी बिच उन्होंने कई नेशनल कॉम्पिटिशन में हिस्सा लिया और उनमे भी जीत हासिल की। इसी तरह लगातार हार्डवर्क करने के बाद 2014 में उन्होंने बैंककॉक के युथ ओलंपिक में अपना पहला इंटरनेशनल गोल्ड जीत।

इतनी कम एज में इतना सब अचीव करने के बाद उन्हें opportunity मिली नेशनल लेवल ट्रेनिंग कैंप ज्वाइन करने की, जिसे Neeraj खुद अपने करियर का टर्निंग प्वाइंट बताते हैं। क्योंकि उन्हें वहां अच्छी फैसेलिटीज, बेहतर डाइट और सबसे इंपॉर्टेंट उन्हें वह नेशनल लेवल जैवलिन एथलीट्स के साथ सीखने का मौका मिला। जिसने उनका हौसला बढ़ाया और मेहनत करने के लिए inspire किया।

जो की सक्सेस के लिए बहुत जरूरी है। क्योंकि अगर आपको लाइफ में कुछ भी अचीव करना है तो ऐसे लोगों के साथ रहो जो आपको आपके गोल की तरह पुश करें। जिनके साथ रहकर आप और हार्डवर्क करने के लिए मोटिवेट हो ना कि जो आपको आपके गोल से दूर लेकर जाए। 

2016 में हुए पोलैंड के IAAF वर्ल्ड चैंपियनशिप्स में Neeraj ने 86.48 मिटर का थ्रो करके अपना नेक्स्ट गोल्ड जीता और साथ ही इतना दूर थ्रो करके वह वर्ल्ड रिकॉर्ड क्रिएट करने वाले फर्स्ट इंडियन एथलीट बने। इसी तरह नीरज कई नेशनल और इंटरनेशनल कंपटीशन जीतते रहे और उनके साउथ एशियन गेम्स की परफॉर्मेंस इम्प्रेस होकर इंडियन आर्मी ने नीरज को जूनियर कमीशंड ऑफिसर की पोस्ट दी।

जो की उनके लिए बहुत बड़ी बात थी क्योंकि उनकी पूरी फैमिली में किसी के पास भी कोई गवर्नमेंट जॉब नहीं थी और उन्हें इतनी कम उम्र में ही एक स्टेबल जॉब मिल गई थी। जहां उन्हें अब अपनी ट्रेंनिंग के लिए अपने फैमिली के इनकम पर depend नहीं रहना पड़ता था। Neeraj बताते हैं कि उन्होंने आर्मी की वजह से discipline maintain करना सीखा।

आर्मी लाइफ जीने की वजह से उन्होंने अपनी मेन्टल स्ट्रेंग्थ को बढ़ाया, वो फिजिकली और मेंटली और भी ज्यादा strong होते गए। जिसकी वजह से उनका अपने गोल पर फोकस करना और आसान हो गया था। Neeraj बताते हैं कि अपने गोल को अचीव करने का आईडिया बहुत सिंपल है, बस अपनी बॉडी को हेल्दी रखो अच्छी डाइट लो वर्कआउट करो और साथ अपने माइंड को स्ट्रांग रखो ताकि वह आपके गोल पर फोकस रहे और डिस्टर्ब ना हो।

मगर इस प्रोसेस को सफल बनाना ही बहुत मुश्किल होता है और जो यह मुश्किल काम कर लेता है वह अपने सभी गोल अचीव कर सकता है। इसीलिए 2018 के कॉमनवेल्थ गेम्स में जैवलिन थ्रो में जीतने वाले नीरज पहले इंडियन बने। 

इसके बाद में उन्हें कई नेशनल अवॉर्ड भी मिले। पर उसी बीच अपने दोस्तों के साथ फुटबॉल खेलते टाइम नीरज के राइट एल्बो में सीरियस इंजरी हो गई। जिसकी वजह से उन्हें सर्जरी करवानी पड़ी और उन्होंने 2019 की वर्ल्ड चैंपियनशिप मिस कर दी और साथ ही टोक्यो ओलंपिक क्वालीफाइंग कंपटीशन शुरू हो चुके थे। अब इतने कम टाइम में उन्हें अपनी एल्बो को ठीक कर के ओलंपिक के लिए भी क्वालीफाई होना था।

Neeraj बताते हैं कि उनके पास कोई ऑप्शन नहीं था सिवाय अपने आपको तैयार करने के। इसीलिए उन्होंने सब्र के साथ अपने आपको ठीक करा। डाइट वर्कआउट सब पर बोहोत फोकस किया उन्हें पता था की अगर उनकी एल्बो ठीक नहीं हुई तो वह इस बार ओलंपिक्स नहीं खेल पाएंगे। इसीलिए वह खुद को बेस्ट बनाने के लिए जो कर सकते थे उन्होंने उसमें एक परसेंट भी कमी नहीं करी। ठीक होने के बाद 2019 में ओलंपिक क्वालीफिकेशन के लिए रेडी होने के लिए साउथ अफ्रीका गए।

जहां उन्होंने जर्मन बायोमैकेनिक्स एक्सपर्ट Klaus Bartonietz से ट्रेनिंग ली और 16 मंथ के गैप के बाद जनवरी 2020 में इंटरनेशनल कंपटीशन में वापस आए। जहां उन्होंने साउथ अफ्रीका के एथलेटिक्स central north west में 87.86 मीटर का थ्रो कर के उस लीग को जीता और साथ ही 85 मीटर से ज्यादा का थ्रो करके वो टोकियो ओलंपिक के लिए भी क्वालीफाई हो गए। 

पर यहाँ भी उनकी मुश्किलें ख़तम नहीं हुई थीं। मेन ओलंपिक के लिए प्रीपेर होने के लिए उन्हें टर्की जाना पड़ा जहा वो अच्छे से ट्रेन हो पाए। पर covid outbreak की वजह से उन्हें मार्च में वापस इंडिया आना पड़ा, जिस वजह से उन्हें कम फैसेलिटीज में ही अपनी ट्रेनिंग करनी पड़ी। 5 मार्च को नीरज ने अपना ही रिकॉर्ड तोड़ दिए दिए 88.07 मीटर का एक नया रिकॉर्ड बनाया।

नीरज बताते हैं कि इस टाइम पर ओलंपिक्स के लिए अच्छे से ट्रेनिंग नहीं कर पा रहे थे जिसके लिए उनका बाहर जाना जरूरी था और covid की वजह से उनका स्वीडन का वीजा रिजेक्ट हो गया। जहां वह सब कुछ ट्राई कर रहे थे पर पेंडेमिक की वजह से उनका गेम इंप्रूव नहीं हो पा रहा था। जिसमें नीरज बताते हैं कि वह उनका बहुत ही फ़्रस्टेटिंग एक्सपीरियंस था। पर वह फाइट करते ही जा रहे थे और अपनी लिमिट को पुश भी करते रहे।  

आखिर-कार उन्हें Europe में ट्रेवल करने की परमिशन मिल गई जहा वो अपने कोच के साथ पेरिस पहुंचे और वहां पर उन्होंने 83.18 मीटर थ्रो करके 2021 का अपना पहला गोल्ड जीता। Covid की वजह से उन्हें कई गेम के लिए उन्हें वीजा मिलने में प्रॉब्लम हो रही थी इतनी ट्रैवलिंग की वजह से उनकी ट्रेनिंग डिस्टर्ब हो रही थी।

पर इस बार भी उन्होंने सारी परेशानी के साथ अपने आप को मेंटली और फिजिकली स्ट्रॉन्ग रखा। उनके कोच UWE Hohn बताते हैं कि नीरज अपनी ट्रेनिंग के टाइम एक नोटबुक लेकर बैठे थे और अपनी टेक्निक्स को इंप्रूव करने के ट्रिक्स बनाते रहते थे। 

नीरज जैवलिन के वर्ल्ड रिकॉर्ड होल्डर के video को बार-बार देखते थे और उनसे सीखते रहते थे। ट्रेनिंग करते टाइम नीरज का मेन फोकस होता था कि वह कैसे अपने आज को बेस्ट बना सकते हैं। जिसका रीज़न है कि इतने सालों का हार्ड वर्क और उनकी हर 1 दिन की ट्रेनिंग की बेस्ट परफॉर्मेंस मिलाकर उन्होंने 7 अगस्त 2021 को इंडिया के लिए 10th ओलंपिक गोल्ड मेडल जीता।

जिसने उन्हें हमारी कंट्री में जैवलिन थ्रो में गोल्ड लाने वाला पहला एथलीट बना दिया। सिर्फ 23 साल की इतनी यंग एज में Neeraj इतना सब कुछ अचीव कर चुके हैं। इस एज में जहां ज्यादातर लोग पार्टी करते हैं दोस्तों के साथ मजे करते हैं गर्लफ्रेंड या बॉयफ्रेंड रखते हैं वही नीरज की कोई गर्लफ्रेंड नहीं है। क्योंकि वह उस टाइम सिर्फ अपने करियर पर सबसे ज्यादा फोकस करना चाहते हैं। नीरज बताते हैं कि उन्होंने लास्ट ईयर ही अपने फोन का यूज करना बंद कर दिया था ताकि वह ज्यादा अच्छे से फोकस कर पाए।

तभी आज उनके पास फॉर्च्यूनर कार है। जहां उनकी पहली बाइक पल्सर 220 थी जो करीब 1.5 लाख की आती थी और आज उनके के पास 10 लाख की harley davidson बाइक भी है। यहां तक कि ओलंपिक में गोल्ड लाने के बाद पूरे देश की तरफ से Neeraj को काफी गिफ्ट मिल रहे हैं। जिसमे हरियाणा गवर्नमेंट ने उन्हें 6 करोड़ का कैश प्राइज दिया है, पंजाब और मनी पुर ने 1 – 1 करोड़ का कैश प्राइज रिवॉर्ड में दिया है।

साथ ही बीसीसीआई और चेन्नई सुपर किंग्स की टीम ने भी उनके लिए एक एक करोड़ का कैश प्राइज दिया। कुछ कंपनी जैसे आनंद महिंद्रा ने उन्हें अपनी लेटेस्ट xuv700 गिफ्ट करी है और इंडिगो फ्लाइट ने उनके लिए पूरे साल का फ्री ट्रैवल एलाउंस किया है।

आज सिर्फ 23 साल की उम्र में ही उनकी नेटवर्क ₹8 से ₹10 करोड़ हो चुकी है। Neeraj Chopra कन्सिस्टेन्सी को अपनी जीत का कारण बताते है। 

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