Google Subtopics System क्या है?

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  • Post last modified:September 4, 2021

16 अक्टूबर 2020 में गूगल ने कई सारे updates की बात की थी, जिसमें सिटी बजाकर गाना पहचानने वाला जादू भी था और passage indexing भी था, जो असल में passage ranking था। इन सबके बीच एक और अनाउंसमेंट था जिस पर लोगों का इतना ज्यादा फोकस नहीं था।

वो टॉपिक था Google Subtopics System, जल्दबाजी में देखने पर ये उतना ज्यादा important नहीं लगता। लेकिन अगर आप इसे BERT Algorithm, SMITH Algorithm और PASSAGE RANKING के साथ मिलाकर देखे तो ये अच्छी वेबसाइट को ज्यादा ट्रैफिक दिलाने की तरफ गूगल का ये एक अच्छा कदम है। आज हम बात करेंगे गूगल के Artificial Intelligence पर बेस्ड Google Subtopics System के बारे में। 

Google Subtopics System

Google Subtopics System एक कंफ्यूज करने वाला टॉपिक है, जिसे हम एक आसान example से समझेंगे। आपने “शोले” फिल्म तो देखी ही होगी, जिसमे असल स्टोरी है गब्बर और ठाकुर की। लेकिन इसमें बसंती की घोड़ी ‘धन्नो’ का एक छोटा सा रोल है, बसंती की मौसी का भी है, अग्रेजो के ज़माने के जेलर भी है और सुरमा भोपाली भी है।

अब आप जरा सोचिए क्या होगा अगर हम हर एक कैरक्टर पर एक पूरी फिल्म बना दे तो। क्या वो पूरी फिल्म बन पायेगी? समझ लो बन भी गई, लेकिन क्या वो चल पायेगी? वो फिल्म काफी ज्यादा बोरिंग भी हो सकती है!

लेकिन वही अगर इन सभी कैरेक्टर को लेकर किसी एक ही फिल्म को बनाया जाये तो फिल्म काफी ज्यादा मजेदार भी होगी और उसे देखने में मजा भी आएगा, जैसे कि शोले।

बिलकुल ऐसे ही गूगल आज तक आपको इन छोटे छोटे कैरक्टर पर फिल्म बनाने के लिए मजबूर करता था। आप सब SEO’s जानते है अगर आपको किसी कीवर्ड पर रैंक करना है तो उसके ऊपर पूरी की पूरी फिल्म बनानी होती थी। मतलब किसी एक कीवर्ड को रैंक कराने के लिए हमें काफी सारा कंटेंट लिखना होता था फिर चाहे वो कम क्वालिटी का ही क्यो न हो।

अगर आप एक पेज पर किसी specific पॉइंट के बारे में थोड़ी सी जानकारी देते है, तो उस पॉइंट के रैंक करने के चान्सेस लगभग जीरो होते थे। क्यो की गूगल पूरे पेज को कंसीडर करता है और जो भी कंटेंट और थीम उस पेज का असल कंटेंट है उसे ही रैंक करता था। लेकिन एडिशनल पॉइंट के लिए रैंक करना बड़ा मुश्किल होता था। इसीलिए SEO’s को एडिशनल पॉइंट के लिए पूरा की पूरा आर्टिकल लिखना होता था। 

लेकिन अक्टूबर में हुए अनाउंसमेंट में गूगल ने ये बताया है की गूगल एक पेज के अंदर किसी subtopic को न सिर्फ समझ सकता है बल्कि उन्हें सर्च रिजल्ट में दिखा भी सकता है। शायद आपको ये passage ranking / indexing जैसा लग रहा होगा लेकिन ऐसा नहीं है।

ये passage ranking / passage indexing से काफी अलग है. Passage ranking किसी एक पेज के अंदर किसी एक ही टॉपिक के अलग अलग पैराग्राफ को सही सर्च रिजल्ट के लिए दिखा सकता है। लेकिन Subtopics System उस पेज के अंदर ऐसे कंटेंट को सर्च रिजल्ट में दिखा सकता है जो पेज के main कंटेंट से बिलकुल अलग है। 

फिर से शोले फिल्म की स्टोरी याद करिए passage ranking गब्बर और ठाकुर के अलग अलग पार्ट को सर्च रिजल्ट में दिखा सकता है। लेकिन Subtopics System जेलर, धन्नो, बसंती की मौसी, और सुरमा भोपाली को भी सर्च रिजल्ट में दिखा सकता है।

अनाउंसमेंट के वक़्त गूगल का कहना था की ये Subtopics System 2020 के अंत तक live होगा। लेकिन Danny Sullivan के मुताबिक ये Mid-November में ही live हो चूका था। आपको देखने में ये टॉपिक काफी छोटा लग रहा होगा लेकिन ये गूगल का काफी बड़ा अपडेट है।

गूगल अभी तक पुरे पेज पर analysis करता था। लेकिन पुरे इंटरनेट के सभी pages को analysis करना और सर्च किए हुए कीवर्ड्स के अनुसार सही रिजल्ट को डिस्प्ले करना काफी मुश्किल काम था। लेकिन अगर किसी पेज के अंदर के सभी टेक्स्ट में से किसी subtopic को निकालना, यह एक नार्मल कंप्यूटिंग से पॉसिबल नहीं है।

इसीलिए गूगल का ये Subtopic System Artificial Intelligence को इस्तेमाल करता है। Subtopic System Neural Network को इस्तेमाल करता है और यह Neural Network गूगल को इतने सारे pages को individually उसके कंटेंट को analyze करने और उनको किसी स्पेसिफिक सर्च के लिए दिखाने की capacity देते है। 

Google Subtopics System दिखने में जितना आसान दिखता है उससे काफी ज्यादा मुश्किल है। पिछले एक साल में गूगल ने Artificial Intelligence पर बेस्ड काफी सारे सोलूशन्स लॉंच किये है। Google Analytics, BERT, SMITH, Spelling Check Algorithm और Passage Ranking ये सब Artificial Intelligence पर बेस्ड है।

अगर आप गूगल के इश्यूज को अच्छे से समझते है तो आपने नोटिस किया होगा की पिछले एक साल में लोगो ने काफी complaint करना शुरू कर दिया है की गूगल उनकी पोस्ट को उनके पेजेज को इंडेक्स नहीं कर रहा है।

गूगल का ये कहना है की वो किसी भी पेज को तभी इंडेक्स करता है जब उसमे unique और useful कंटेंट होता है। हम सबको पता है की गूगल इंडेक्सिंग में इतनी ज्यादि कंजूसी कभी नहीं दिखता था। पिछले एक साल से गूगल ऐसा कर रहा है जिसका रीज़न ये सब updates हो सकते है।

अगर अभी तक आप इस आर्टिकल को पढ़ रहे हो तो इसका मतलब है की आप अच्छा कंटेंट लिखने या लिखवाने में इंट्रेस्ट रखते है। आपके अच्छे कंटेंट का वो पार्ट भी सर्च रिजल्ट में दिखाया जा सकता है जो अभी तक गूगल इग्नोर करता था। 

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